नई दिल्ली, 12 मई 2026: केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने आज पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत विकसित दो उन्नत मौसम पूर्वानुमान उत्पादों का शुभारंभ किया। इनका उद्देश्य देश भर में अत्यंत-स्थानीय, प्रभाव-आधारित और एआई-संचालित मौसम सेवाएं उपलब्ध कराना है।
आज शुभारंभ किए गए दो उत्पादों में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा पहली बार “देश के विभिन्न हिस्सों में मानसून की आगे बढ़ने का पूर्वानुमान” के रूप में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)- संचालित प्रणाली और एक पायलट सेवा के रूप में “उत्तर प्रदेश के लिए उच्च स्थानिक रिज़ॉल्यूशन वर्षा पूर्वानुमान” शामिल है।
इन प्रणालियों को भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), पुणे और राष्ट्रीय मीडियम रेंज मौसम पूर्वानुमान केंद्र (एनसीएमआरडब्ल्यूएफ) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत की मौसम पूर्वानुमान क्षमताओं में बड़ा बदलाव आया है। प्रौद्योगिकी, डेटा एकीकरण और उन्नत मॉडलिंग ने पूर्वानुमान की सटीकता और आईएमडी सेवाओं में जनता के विश्वास को काफी बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि आईएमडी आज गवर्नेंस, आपदा तैयारी, कृषि योजना और रोजमर्रा के सार्वजनिक निर्णय लेने का एक अभिन्न अंग बन गया है।
मंत्री ने कहा कि नवनिर्मित प्रणालियां पारंपरिक मौसम पूर्वानुमान से हटकर प्रभाव-आधारित और निर्णय-सहायक पूर्वानुमान की ओर एक बड़े बदलाव का प्रतीक हैं। यह प्रणालियां किसानों, प्रशासकों, आपदा प्रबंधकों और नागरिकों को सटीक, स्थान-विशिष्ट और कार्रवाई योग्य जानकारी प्रदान करने में सक्षम हैं।

भारत के मौसम संबंधी बुनियादी ढांचे के तेजी से आधुनिकीकरण का जिक्र करते हुए डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि लगभग एक दशक पहले देश में मुश्किल से 16 से 17 डॉप्लर मौसम रडार थे, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर लगभग 50 हो गई है और मिशन मौसम के तहत 50 और रडार लगाने की योजना है। उन्होंने कहा कि निगरानी नेटवर्क, स्वचालित मौसम स्टेशनों, उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग प्रणालियों और डिजिटल प्रसार प्लेटफार्मों के इस विस्तार से पूरे देश में मौसम पूर्वानुमान क्षमता और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों में काफी सुधार हुआ है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि एआई-आधारित मानसून अग्रिम पूर्वानुमान प्रणाली प्रत्येक बुधवार को मानसून की प्रगति का संभाव्य पूर्वानुमान चार सप्ताह पहले तक उपलब्ध कराएगी।
यह प्रणाली कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के प्रसार ढांचे के माध्यम से 16 राज्यों और 3,000 से अधिक उप-जिलों के किसानों को सहायता प्रदान करने के लिए बनाई गई है।
उन्होंने कहा कि यह प्रणाली कृषि नियोजन और तैयारियों के लिए उपयोगी पूर्वानुमान प्रदान करने हेतु एआई-आधारित पूर्वानुमान मॉडल, विस्तारित रेंज पूर्वानुमान प्रणालियों और सांख्यिकीय तकनीकों को एकीकृत करती है।