धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से दिया इस्तीफ़ा

Union Minister Dharmendra Pradhan

     रायपुर, 25 जुलाई, 2026: युवा छात्रों के समूह ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) की मांगों के सामने झुकते हुए, वरिष्ठ भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान ने आज शिक्षा मंत्री के तौर पर केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा दे दिया।

     कॉकरोच जनता पार्टी ने कल कहा था कि शिक्षा मंत्री के तौर पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की उनकी मांग पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा और चेतावनी दी थी कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे अपने 35 दिनों से चल रहे आंदोलन को और तेज़ करेंगे।

     कॉकरोच जनता पार्टी और पूरे भारत में विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के लिए एक बड़ी जीत के तौर पर, धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। यह घोषणा देश भर में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच हुई है, जिसमें मंत्री के इस्तीफ़े की मांग की जा रही थी और उन पर लगातार प्रश्न-पत्र लीक होने के लिए ज़िम्मेदार होने का आरोप लगाया जा रहा था।

     जनता के नाम लिखे पत्र में, धर्मेन्द्र प्रधान ने नीट विवाद पर बात करने से पहले प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया।

     धर्मेन्द्र प्रधान ने नीट (NEET) परीक्षा रद्द होने के बारे में लिखा, “पहले ही दिन से, इसपर मैंने ज़िम्मेदारी ली और इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा। मेरा यह संकल्प था कि हम किसी भी मेधावी कि संभावना परीक्षा माफिया के कारण ख़राब नहीं होने देंगे, किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे।

     पद छोड़ने के अपने फ़ैसले के बारे में प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर लिखा , “जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ ना उठाएं, देश कि एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर फोकस करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र माननीय प्रधानमंत्री जी को भेज दिया है।”

     मंत्री के इस्तीफ़े की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन 6 जून को शुरू हुए थे, जब CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने व्यंग्यात्मक ऑनलाइन पार्टी बनाई और जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए।

     प्रदर्शनकारियों ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के अलावा, NEET परीक्षा के उम्मीदवारों के लिए न्याय और मुआवज़े तथा शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांग की।

     20 जुलाई को सुरक्षा बलों द्वारा छात्रों पर लाठीचार्ज किए जाने के बाद मंत्री के इस्तीफ़े की मांगें और तेज़ हो गईं।

     विपक्षी कांग्रेस भी इन मांगों में शामिल हो गई। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की तीन मांगें ऐसी हैं जिन पर कोई समझौता नहीं हो सकता।

     गांधी ने कहा कि पहली मांग यह है कि “भ्रष्ट, अक्षम और गलत नीतियों वाले” शिक्षा मंत्री को “हटाया” जाए।