नई दिल्ली, 03 फरबरी 2026: भारत सरकार ने अगले पांच वर्षों में देश की सभी पंचायतों और गांवों तक पहुँचने के उद्देश्य से नई बहुउद्देशीय पैक्स/डेयरी/मात्स्यिकी सहकारी समितियां स्थापित करने की योजना को अनुमोदित किया हैI
राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस के अनुसार दिनांक 20.01.2026 तक देश भर में कुल 32,802 नए पैक्स, डेयरी और मात्स्यिकी सहकारी समितियां पंजीकृत की गई हैं; और 15,793 डेयरी और मात्स्यिकी सहकारी समितियों को सशक्त बनाया गया है।
नवस्थापित बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियों (पैक्स), डेयरी और मात्स्यिकी सहकारी समितियों के स्वतंत्र या तीसरे पक्ष के मूल्यांकन पर अभी तक विचार नहीं किया गया है। सरकार आकांक्षी जिलों और अल्पसेवित क्षेत्रों सहित सहकारी कवरेज में कमियों को चिह्नित करने के लिए राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (एनसीडी) का उपयोग करते हुए राज्य-वार और क्षेत्रीय विश्लेषण करती है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी कि आज की तिथि तक, स्वीकृत 79,630 पैक्स में से 61,478 पैक्स का डिजिटलीकरण किया जा चुका है और उन्हें साझा कोर बैंकिंग समाधान, एईपीएस, यूपीआई जैसी पहलों को अपनाने के लिए सुगम बनाया गया है; साथ ही सहकारी वित्तीय सेवाओं के आधुनिकीकरण के लिए सहकारी बैंकिंग हेतु डिजिटल प्लेटफॉर्म भी शुरू किए गए हैं।
प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियों को बहुउद्देशीय, समावेशी और पारदर्शी संस्थानों में बदलने के लिए आदर्श उपविधियाँ विकसित की गई हैं और सभी राज्यों तथा संघ राज्यक्षेत्रों को परिचालित कर दी गई हैं। ये उपविधियाँ व्यापकता-आधारित सदस्यता का प्रावधान करती हैं और सहकारी शासन में महिलाओं तथा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति का पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करती हैं।
इसके अलावा, बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी (संशोधन) अधिनियम, 2023 बहु-राज्य सहकारी समितियों के बोर्ड में महिलाओं के लिए दो सीटें और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के लिए एक सीट के आरक्षण का अधिदेश करती है।
राष्ट्रीय सहकारिता नीति (एनसीपी) 2025 में भी महिलाओं और दुर्बल वर्गों के लिए सदस्यता और नेतृत्व की भूमिकाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।