रायपुर, 17 मार्च 2026: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज कहा कि राज्य के कुल वन क्षेत्र के मात्र 0.96 प्रतिशत क्षेत्र में खनिज रियायतें स्वीकृत हैं और केवल 0.24 प्रतिशत वन क्षेत्र में ही खनन कार्य की अनुमति दी गई है।
मुख्यमंत्री साय ने विधानसभा में अपने विभागों से संबंधित अनुदान मांगों की चर्चा के जवाब में कहा कि केवल 0.24 प्रतिशत वन क्षेत्र में ही खनन कार्य की अनुमति दी गई है और खनन कार्यों के एवज में बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया गया है तथा ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत दो वर्षों में करीब 7 करोड़ पौधे लगाए गए हैं।
भारतीय वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में वन एवं वृक्ष आवरण में 683 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है।

उन्होंने यह भी बताया कि खनिज विभाग में पारदर्शिता के लिए ‘खनिज ऑनलाइन 2.0’ पोर्टल तथा डीएमएफ पोर्टल 2.0 लागू किया गया है। आम जनता को रियायती दरों पर रेत उपलब्ध कराने और माफिया पर अंकुश लगाने के लिए छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत नियम 2025 लागू किए गए हैं तथा रेत की ई-नीलामी शुरू की गई है।
साय ने कहा कि डीएमएफ को पुनः पारदर्शी बनाते हुए दो वर्षों में 4 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि प्राप्त हुई और 19 हजार से अधिक कार्य स्वीकृत किए गए। डीएमएफ कार्यों का सोशल ऑडिट भी कराया जा रहा है तथा शिकायत निवारण तंत्र विकसित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खनिज ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया को भी गति दी गई है और अब तक 62 ब्लॉकों की सफल नीलामी हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि रेयर अर्थ, क्रिटिकल और स्ट्रैटजिक खनिजों के अन्वेषण के लिए प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों से एमओयू किए गए हैं, जिससे क्लीन एनर्जी और नए निवेश के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुव्यवस्थित खनन के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।